खंडवा महिला एवं बाल विकास विभाग की मनमानी — वन स्टॉप सेंटर की व्यवस्था रामभरोसे, अधिकारी भी अनजान जानिए पूरा मामला
खंडवा महिला एवं बाल विकास विभाग की मनमानी — वन स्टॉप सेंटर की व्यवस्था रामभरोसे, अधिकारी भी अनजान जानिए पूरा मामला
सुशील विधाणी खंडवा महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। खंडवा स्थित वन स्टॉप सेंटर, जो प्रताड़ित महिलाओं को सहायता, सुरक्षा और पुनर्वास के उद्देश्य से संचालित किया जाता है। वहां इस समय प्रशासनिक अव्यवस्था और अनदेखी की स्थिति बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार अगस्त और सितंबर माह में खंडवा वन स्टॉप सेंटर का अतिरिक्त प्रभार परियोजना अधिकारी पूजा राठौर को सौंपा गया था।लेकिन वे पिछले 15 से अधिक दिनों से अवकाश पर हैं। इस दौरान विभाग ने किसी अन्य अधिकारी को जिम्मेदारी नहीं सौंपी और न ही सेंटर की गतिविधियों की निगरानी के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई।
वन स्टॉप सेंटर का उद्देश्य प्रताड़ित महिलाओं को तात्कालिक सहायता और परामर्श प्रदान करना है।किंतु पिछले कई दिनों से यहां किसी प्रताड़ित महिला को नहीं लिया गया है। जबकि स्टाफ पर्याप्त मात्रा में मौजूद है।इसी बीच बाल कल्याण समिति (CWC) द्वारा कुछ नाबालिग बालिकाओं को अस्थायी रूप से सेंटर में रखा गया है, जो नियमों के विपरीत है। प्रताड़ित महिलाओं और नाबालिग बालिकाओं को एक ही परिसर में रखना न केवल नियम विरुद्ध है, बल्कि सुरक्षा दृष्टि से भी अनुचित माना गया है। बताया गया कि एक बालिका 10 दिनों से सेंटर में रुकी हुई थी, जबकि तीन दिन पूर्व एक अन्य बालिका को भी वहीं रखा गया है।
परियोजना अधिकारी पूजा राठौर से इस संबंध में बात करने पर उन्होंने कहा —
“मैं नवरात्रि में पारिवारिक कारणों से छुट्टी पर थी। वर्तमान स्थिति की जानकारी मुझे अभी नहीं है। वहां की जानकारी महिला बाल विकास अधिकारी से प्राप्त करनी होगी।”
इसके बाद खंडवा महिला बाल विकास (DPO) अधिकारी श्रीमति रतना शर्मा से संपर्क किया गया। उन्होंने बताया —
“पूजा राठौर द्वारा परिवार में किसी की मृत्यु होने के कारण वे अवकाश पर हैं। उन्होंने किसी को चार्ज दिया है या नहीं, इसकी मुझे अभी जानकारी नहीं है। मैं इस विषय में पता लगाकर बता सकती हूं। काफी दिनों से वे छुट्टी पर हैं, और इस बारे में मुझे केवल व्हाट्सएप संदेश से ही सूचना मिली है।”
इस बीच, वन स्टॉप सेंटर में तीन गार्ड, तीन केयरटेकर, तीन केस वर्कर और एक काउंसलर कार्यरत हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी की अनुपस्थिति में व्यवस्थाएं फोन और मौखिक निर्देशों पर ही चल रही हैं। गौरतलब है कि दो माह पूर्व भी सेंटर के स्टाफ ने अनियमितताओं को लेकर जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई थी, परंतु सुधार के बजाय स्थिति और अधिक ढीली हो गई है।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि विभागीय लापरवाही के चलते वन स्टॉप सेंटर “रामभरोसे” चल रहा है।
प्रताड़ित महिलाओं की सुरक्षा और सहायता के लिए स्थापित यह केंद्र अब विभागीय उपेक्षा और गैरजिम्मेदारी का प्रतीक बन गया है।
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